अभिभावक, छात्र और लॉकडाउन

कोरोना के वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है। इसी वजह से स्कूल और कॉलेज बंद है। हालांकि बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही है। बच्चे सवाल पूछ रहे हैं और अध्यापक उनकी जिज्ञासाओं को शांत कर रहे हैं।

अभी किसी को नहीं पता कब तक स्थितियां सामान्य होंगी? सामान्य होंगी तो शारीरिक दूरी अभी कितने दिनों तक बरतने की जरूरत है?
कक्षाओं में एक साथ 50 से ज्यादा बच्चे बैठते हैं। कई बार यह संख्या सैकड़ों तक पहुंच जाती है। खासकर कोटा और दिल्ली के मुखर्जी नगर जैसे शहरों में जहां एक साथ सैकड़ों बच्चे क्लास करते हैं और एक ही कमरे में कई-कई बच्चे मिलकर रहते हैं। ऐसे में सावधानी न बरती गई तो उसके बुरे परिणाम हो सकते हैं।

इस लॉक डाउन से अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बच्चों के दिनचर्या भी बिगड़ रही है। हालांकि ऑनलाइन क्लासेज शुरू होने से दिनचर्या में कुछ सुधार आया है। लेकिन अभिभावकों की भी चिंता जायज है आखिर घर पे बच्चा क्या सीखेंगे?

उच्च शिक्षा ले रहा है युवाओं का तो फिर भी ठीक है उन्हें पता है उन्हें क्या करना है। इनके अभिभावकों को भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

लेकिन जिन अभिभावकों के बच्चे प्राथमिक या माध्यमिक स्तर पर है उनको बच्चों का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। क्यों कि छोटे बच्चों को पाता नहीं होता उनके लिए क्या सही है क्या गलत है। अब इन बच्चों की ऑनलाइन क्लास शुरु हो गई है तो इनका पूरा दिन क्लास करने और होमवर्क करने में निकल जाता है।

लेकिन प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा ले रहे बच्चों के लिए स्कूल बहुत जरूरी होता है क्योंकि वहां जाकर जब यह अलग-अलग तरह बच्चों से टीचर से मिलता है तो इन का संपूर्ण विकास हो पाता है। हालांकि अभी यह संभव नहीं है।

ऑनलाइन क्लास में छात्रों का मन नहीं लगता। फिर भी जो बड़े बच्चे हैं वह तो ध्यान से पढ़ रहे है, पर जो छोटे हैं वह ध्यान नहीं दे पाते। लेकिन अभिभावकों को उनके ऊपर प्रेशर देने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि लॉक डाउन के कारण वे घर में हैं, बोर हो रहे हैं, बाहर खेलने भी नहीं जा पा रहे हैं। भले ही वह बता नहीं पाते लेकिन वो भी हम लोगों की तरह है मानसिक रूप से परेशान हैं इसीलिए उनके ऊपर दबाव बनाना ठीक नहीं है। जब स्कूल खोलेंगे तो वो खुद ही उसे दिनचर्या में ढल जाएंगे।

बच्चों के स्क्रीन टाइम बढ़ने से भी अभिभावक बहुत परेशान हैं। पर इसमें किया भी क्या जा सकता है, ये समय की मांग है। बच्चों को ऑनलाइन क्लास से दूर भी नहीं रखा जा सकता है। लेकिन अभिभावक कुछ सावधानियां बरत सकते हैं जैसे कि ऑनलाइन ऑनलाइन क्लास वो फोन की जगह लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पे करने को दे।
इससे ये फायदा होगा कि मोबाइल का स्क्रीन बहुत छोटा होता है उसमें बच्चे ठीक से देख नहीं पाते। लेकिन जब वह लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर देखेंगे तब वो अच्छे से समझ सकते हैं और मोबाइल के मुकाबले लैपटॉप या टीवी आंख से दूरी पर रहता है तो वह बच्चों की आंखों को भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएगा। अगर संभव हो तो होमवर्क सीट बच्चों को प्रिंट करके दें जिससे उनका स्क्रीन टाइम भी कुछ कम होगा।

बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्र भी बहुत चिंतित हैं लेकिन सीबीएसई ने छात्रों को आश्वस्त किया है कि लॉकडाउन खुलने के 10 दिन बाद उनकी परीक्षाएं शुरू होगी।

विद्यादान 2.0- अप्रैल 22, 2020 को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने दीक्षा एप पर ‘विद्यादान 2.0’ का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य शिक्षाविदों, संगठनों और इ-लर्निंग सामग्री को एक साथ लाना है। जिसका उपयोग देश भर के लाखों बच्चों द्वारा दीक्षा एप पर कहीं भी और कभी भी सीखने के लिए किया जा सके।

नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया (एनडीएल)- इसके पहले 17 जून 2015 को शुरू किए गए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया (एनडीएल) का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों को डिजिटल शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराना है। ये विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं आदि के लिए निशुल्क उपलब्ध है। यहां 60 से अधिक प्रकार के शिक्षण संसाधन उपलब्ध है जैसे किताबें, लेख, वीडियो थीसिस आदि। इसका ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।

स्वयंप्रभा- अगस्त 2016 में एचआरडी मिनिस्ट्री ने स्वयंप्रभा नाम से 32 टीवी चैनलों का शुभारंभ किया जिसका उद्देश्य प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा ले रहे छात्रों को उनके विषयों को बेहतर ढंग से समझने में और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में उनकी मदद करना था।

5 सितंबर 2017 को एचआरडी मिनिस्ट्री और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षकों के लिए एक डिजिटल राष्ट्रीय मंच की आवश्यकता को संबोधित करने के लिए एक पहल की और इसे दीक्षा का नाम दिया। यह पोर्टल शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए समग्र शिक्षा सुनिश्चित करता है। फिना यहां पर कक्षा 1 से 12 तक की शैक्षिक संसाधन उपलब्ध है।  इसका ऐप प्ले स्टोर से भी डाउनलोड किया जा सकता है। diksha.gov.in पर जाकर भी सारे शैक्षिक संसाधन का उपयोग कर सकते हैं।

माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर भी समस्त कक्षाओं हेतु विषयवार इ-बुक उपलब्ध है।

लिंक्डइन लर्निंग- वीडियो लर्निंग प्लेटफॉर्म लिंडा डॉट कॉम को अब लिंक्डइन लर्निंग के नाम से जाना जाने लगा है। शॉर्ट टर्म ऑनलाइन कोर्सेज के लिए यह एक बेहतर प्लेटफॉर्म है। यहां पर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से संबंधित 600 से अधिक कोर्स, डिजाइन से जुड़े 700, बिजनेस से जुड़े 1200, वेब डेवलपमेंट से 700 और फोटोग्राफी से संबंधित 700 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से ऑनलाइन कोर्स का चयन कर सकते हैं। अपनी स्किल को इंप्रूव करने के लिए भी इस प्लेटफॉर्म का फायदा उठा सकते हैं। यह आपकी नॉलेज में इजाफा ही करेगा। अच्छी बात यह है कि फिलहाल यहां एक महीने का फ्री ट्रायल ले सकते हैं। कोर्स शुरू करने के लिए पहले आपको यहां पर साइन अप करना होगा।www.lynda.com

स्किल शेयर- अगर आप ऑनलाइन कुछ नया सीखना या फिर कोई ऑनलाइन कोर्स करना चाहते हैं, तो एक बार स्किल शेयर साइट को ट्राई करना चाहिए। फिलहाल नए यूजर के लिए स्किल शेयर प्रीमियम दो महीने के लिए फ्री है यानी बहुत सारे शॉर्ट टर्म कोर्स को फ्री में एक्सेस कर पाएंगे। इस प्लेटफॉर्म से डिजाइन, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, फोटोग्राफी, फिल्म, राइटिंग, क्राफ्ट्स, क्लीनर आदि से जुड़े 20 हजार से अधिक ऑनलाइन क्लासेज का फायदा उठाया जा सकता है। कोर्स को एप्स के जरिए भी एक्सेस किया जा सकता है। यह एप एंड्रॉयड और आइओएस के लिए भी उपलब्ध है। https://www.skillshare.com

स्टेप: अगर आप मोबाइल एप पर पढ़ने में कंफर्टेबल महसूस करते हैं, तो फिर इस एप को ट्राई कर सकते हैं। यह क्लाउड बेस्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जहां से ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। https://stepik.org

नीट की तैयारी में कर रहे छात्र ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऑनलाइन प्लेटफॉर्स पर उपलब्ध स्टडीमैटीरियल का लाभ उठाने के लिए इन लिंक्स पर विजिट करें।
https://nta.ac.in/lecturesContent
www.embibe.com/medical/test
https://www.olabs.edu.in

अनाकेडमी– प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में लगे छात्र इसकी भी मदद ले सकते हैं।

अंत में आप सभी से अनुरोध है सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करिए। सामाजिक दूरी बनाए रखिए और बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलिए।

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